शायद वो पत्थर की लकीरें खींचता नहीं
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संचित किए ही जाते हैं, कोई सींचता नहीं
इस धरा पे क्यों मानव का मन रीझता नहीं
क्यों रव्वैये आज भी उसके पुराने हैं,
शायद वो पत्थर की लकीरें खींचता नह...
6 hours ago

