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सोने का पिंजरा
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*पिंजरा और पंख-20*
*लघुकथा श्रृंखला : दिनेशराय द्विवेदी*
*सुबह *की धूप से कमरा 106 नहाया हुआ था. शगुन की आँखें खुलीं. किरण अभी सो
रही थी, भरतपुर की सीमा...
8 hours ago

